बना कर इश्क का आदी, हमे जिसने भुलाया है Poem by Abhishek Omprakash Mishra

बना कर इश्क का आदी, हमे जिसने भुलाया है

बना कर इश्क का आदी, हमे जिसने भुलाया है
जिस मासूम ने अब तक, हमे इतना रुलाया है
मगर देखो, मेरे हमदम, ख़ुशी का दौर आया है
वहाँ महफ़िल सजी है और उसने फिर बुलाया है
''कवि अभिषेक ओमप्रकाश मिश्रा''

Saturday, February 7, 2015
Topic(s) of this poem: love and pain
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