Kamal Meena


तुझे भी एहसास हैं... - Poem by Kamal Meena

तुझे पाने की ज़िद तो कभी थी ही नहीं
बस तुझे खोना नहीं चाहता
शायद मेरे कहने का अंदाज ग़लत हो
पर तुझे भी एहसास हैं
मेरा हर इक लफ्ज़ दिल से निकला...

हाँ दर्द भी होता हैं
तू समझ तक नहीं पाया
ये दिल क्या चाहता हैं
या फिर समझ के भी अनजान हैं...

जब भी बात दिल की
तूने बड़ी आसानी से नज़रअंदाज कर दिया
तुझे एहसास तो हैं मेरी हालत का
इस दर्द से तू भी गुजरा हैं...


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Poem Submitted: Tuesday, March 17, 2015



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