तकदीर Poem by Shobha Khare

तकदीर

दौलत, ताकत, दोस्ती, लोकप्रियता, प्यार
अगर नहीं तू साथ मे, सब कुछ है बेकार II

धन का रखे हिसाब पर साँसे गिन न पाय
इसी तरह हर आदमी, धरती से उठ जायII


चिंता नहीं भविष्य की बीते पर क्यो रोये
वर्तमान की साध ले होती होय सो होय II

वो खुद अपने हाथ से, खीचे भाग्य लकीर
ढेके पर बनती नहीं, इंसान की तकदीर II

Friday, May 8, 2015
Topic(s) of this poem: life
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