जीने की आरजू Poem by Shobha Khare

जीने की आरजू

जिन्दा रहने के लिए जीने की आरजू जरूरी है
जैसे किसी फूल के लिए उसकी खुशबू जरूरी हैi

यूँ तो सारी दुनिया जी रही दोस्तो जिंदिगी,
मगर दिल मे भी जीने की जुस्तजू जरूरी है I


जैसे खुशी मे होंठो पर मुस्कराहट होती है,
वैसे ही गम मे आंखो के लिए आँसू जरूरी है I

आफ्नो से तो हर पल ही मिलना होता है,
कभी -कभी गैरो से भी गुफ्तगू जरूरी है II

Sunday, July 19, 2015
Topic(s) of this poem: life
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