आदर Poem by Shobha Khare

आदर

आदर व प्यार की रोशनाई से
भीगी कलम ने - - -
मन की सीपी के मोतियो को
अक्षर बना वाक्य मे गूँथ दिया
हर वाक्य बन गया - - -
इबारत इबादत की
और वो इबादत बन गयी ii

Wednesday, August 5, 2015
Topic(s) of this poem: life
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