मुझे अब तक, तेरे झूठे बहाने याद आते हैं Poem by Abhishek Omprakash Mishra

मुझे अब तक, तेरे झूठे बहाने याद आते हैं

तुम्हारे संग गुजारे जो, जमाने याद आते हैं
मोहब्बत के वही किस्से पुराने याद आते हैं
वो तेरा देर से आना मेरे सीने से लग जाना
मुझे अब तक, तेरे झूठे बहाने याद आते हैं
'अपर्णेय'

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