मिटा कर हाथ कीं रेखा, मेरी तकदीर बन जाओ Poem by Abhishek Omprakash Mishra

मिटा कर हाथ कीं रेखा, मेरी तकदीर बन जाओ

मिटा कर हाथ कीं रेखा, मेरी तकदीर बन जाओ
सिरहाने मैं तुम्हें रख लूँ, कोई तस्वीर बन जाओ
सदियों से मेरे दिल ने, सनम इक ख्वाब देखा है
गुजारिश है मेरे उस ख्वाब की ताबीर बन जाओ
'कवि अभिषेक ओमप्रकाश मिश्रा '

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