चाहत तुझे पाने की Poem by Tulsi Shrestha

चाहत तुझे पाने की

चाहात तुझे पाने की
आज भी बाकी है ।
माना की अब
तू मेरी नहीं रहा ।
किसी औरो की
धड़कन बन चुकी हो ।
फिर भी ए मेरा नादान दिल में
तेरी सुनहरे याद छिपी है ।
दरवाजे पर हर दस्तक
तेरी वापस आने का
दिलासा मुझे दिलाता है ।
ये मेरा नमी आंखे
तेरी इन्तजार में
अब तक चैन से
सो नहीं पाया हैं ।
मेरा बागियान की खुशबू
छीनकर तू जो चली थी ।
अश्क के दरीया में
डूबा ये दिवाना
मौत के खौफ मे भी
आस जीवन का कर बैठा ।
हकीकत में ना सही
ख्वाबो में तुमसे
मिलने की उम्मीद कर बैठा हूं ।

रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Tuesday, May 12, 2020
Topic(s) of this poem: betrayal,hope,love
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