तू हीं तो हैं, जिसे अपना समझकर दर्द कहूं सकू
तू हीं तो है, जिसे अपना सुख बाटू ।
कौन है मेरा ईस दुनिया में
तू हीं तो हैं, जिसे मैं अपना कहूं ।
काश! तुम मिल जाए मुझको
नहीं चाहिए जन्नत मुझे ।
सोना चांदि क्या चिज हैं
अनमोल नहीं तुझसे बढकर ये ।
तेरी गोद मे सोने मिले तो
उर्वशी भी नहीं चाहिए मुझको ।
तेरी आँचल की छहरा मिले तो
वसंत झुतु भी नहीं चाहिए मुझको ।
तेरी चरण के प्रवेश संग
मंदिर की घण्टी खुद हीं बजा ।
आरती दीप प्रज्वलित हुआ
सौंदर्य की देवी की आगमन से ।
मृत्यु और जीवन कि बीच
था में गहरा मझधार में
निष्प्राण देह को स्पनदन मिला
मेरे जीवन में, तेरी आने से ।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
@Copyright Reserved
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem