सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए ( 51- 5 5) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए ( 51- 5 5)

ताल मिलाया सब पंछियो ने
मधुर प्रेम गीत रचने को ।
जरुरत नहीं पडा कोई भाषा
तारीफ करने तेरी रुप को ।

तेरी गीत मुझे बुलाती
तेरी प्रीत मुझे लुभाती ।
प्रीत गीत का बंथन मनोहर
यहीं है जीवन की धरोहर ।

भागा सब दिल का दर्द
जैसे ही तू, मुझे मिली ।
लाश को भी जीवन देकर
मेरी लिए तू, बनी संजिवनी ।

मेरा उत्पति का कारण तू
मेरा आदि अंत भी तू ।
सच है, हम्हारा जिस्म अलग
लेकिन हम्हारा आत्मा एक ।

मेरा गीत की आरम्भ के साथ
तुम्हारी पायल का झंकार बजा ।
मादकता छाया प्रीत गीत में
स्बर और ताल के अदभूत संगम से ।

रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Tuesday, November 17, 2020
Topic(s) of this poem: grief,heart,love
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