सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (71- 75) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (71- 75)

पहुचे नदि जब सागर में
फिर वापस आगई मेघा बन के ।
यह सब रीत दोहराया उसने ।
सिर्फ तुझे बार बार देखने ।

प्रतीक बना तेरी आंसू का
सब सागर का नमकीन पानी ।
बिम्ब बना तेरी चचंलता की
कल कल बेहती नदि के पानी।

सब सागर एक साथ उबला
जब तेरी नयनों से आंसू छलका ।
कयामत लाया उन नयनों ने
प्रणय कुण्ड़ की भवर अंडर।

जो प्रीत गीत तुम गाते
आसमा ने वो सब दोहराया ।
और कल कल बेहती नदियां
भर देता उसमे मनोहर संगीत ।

रेगिस्तान पर भी हरियाली छाया
पीछा करते तुझे, मेघ जो पहुचा ।
तुम्हारा चरण का स्पर्श भी
अविरल बर्षा की कारण बनी ।


रचनाकार ः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Thursday, November 19, 2020
Topic(s) of this poem: beauty,love,music
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 19 November 2020

बहुत सुन्दर कविता एवं प्रेम के वियोग पक्ष की अद्वितीय अभिव्यक्ति. शेयर करने के लिए आपका धन्यवाद.

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