सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (76-80) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (76-80)

आसमा का सब सितारे मैने
तोड़ने के वादा जब तुमसे किया ।
खुशी से झड गया, वो सब धर्ती पे
जगमगाति जुगनू बनकर ।

जल तंरग निकला सागर से
तेरी पावन चरण को चुमने ।
और झुक गया आसमां भी
तोड़के अपने अभिमान सारा ।

मनमोहक बना तेरी लाल चेहरा
बीच में भवर जो बना, डिम्पल ।
रिसते हुए, गुलाबी दो अधर
मधुकुण्ड बना मेरा चुम्बन का ।

तुम्हारी यौवन की ताप से
पथर पिघलकर नदियां बना ।
देखकर तेरी मन मोहनी रुप
हिम शिखर पर आग लगा ।

जब मैंने तेरी अधर को चुमा
तब मुह छुपाकर जैसि तू सरमाया ।
लालिमा छाया सारा आसमां पे
मादकता फैला, प्रेम जगत में।

रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Thursday, November 19, 2020
Topic(s) of this poem: lips,love,lust
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