आसमा का सब सितारे मैने
तोड़ने के वादा जब तुमसे किया ।
खुशी से झड गया, वो सब धर्ती पे
जगमगाति जुगनू बनकर ।
जल तंरग निकला सागर से
तेरी पावन चरण को चुमने ।
और झुक गया आसमां भी
तोड़के अपने अभिमान सारा ।
मनमोहक बना तेरी लाल चेहरा
बीच में भवर जो बना, डिम्पल ।
रिसते हुए, गुलाबी दो अधर
मधुकुण्ड बना मेरा चुम्बन का ।
तुम्हारी यौवन की ताप से
पथर पिघलकर नदियां बना ।
देखकर तेरी मन मोहनी रुप
हिम शिखर पर आग लगा ।
जब मैंने तेरी अधर को चुमा
तब मुह छुपाकर जैसि तू सरमाया ।
लालिमा छाया सारा आसमां पे
मादकता फैला, प्रेम जगत में।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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