सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (81- 85) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (81- 85)

Rating: 4.0

तेरी धड़कन के प्रतिध्वनि पर
मैने अपना नाम लिख दिया ।
और मेरे दिल के मनमंदिर पर
तेरे नाम के दीप जला दिया ।

मेरे नयनों का ज्योति भी तू
अधर का मुस्कान भी तू।
मेरे जीवन के हर प्रतिबिम्ब पर
मे तो देखती हूॅ, तू ही तू ।

मेरे लिए तेरी यौवन बना
ना पि के भी मदहोश करने वाला मदिरा ।
मेरे लिए तेरी रुप बना
आकास गंगा का झिलमिलाते सितारा ।

मेरे दिल ने तुझे चुना
मेरे तन ने तुझे हीं ढूंढा ।
मेरा प्यार का उदगम स्थल तू
मिलन का गंगा सागर भी तू।

मेरा दिल चुराने वाली तू
नीद छीन ने वाली भी तू ।
कुछ भी तो, बाकी नही रहा मुझमे
लौटा दो प्रिय, जो कुछ छीना तुने मुझसे ।


रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Friday, November 20, 2020
Topic(s) of this poem: beauty,dream,heart,love
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