तेरी धड़कन के प्रतिध्वनि पर
मैने अपना नाम लिख दिया ।
और मेरे दिल के मनमंदिर पर
तेरे नाम के दीप जला दिया ।
मेरे नयनों का ज्योति भी तू
अधर का मुस्कान भी तू।
मेरे जीवन के हर प्रतिबिम्ब पर
मे तो देखती हूॅ, तू ही तू ।
मेरे लिए तेरी यौवन बना
ना पि के भी मदहोश करने वाला मदिरा ।
मेरे लिए तेरी रुप बना
आकास गंगा का झिलमिलाते सितारा ।
मेरे दिल ने तुझे चुना
मेरे तन ने तुझे हीं ढूंढा ।
मेरा प्यार का उदगम स्थल तू
मिलन का गंगा सागर भी तू।
मेरा दिल चुराने वाली तू
नीद छीन ने वाली भी तू ।
कुछ भी तो, बाकी नही रहा मुझमे
लौटा दो प्रिय, जो कुछ छीना तुने मुझसे ।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
@ Copyright Reserved
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem