सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (86- 90) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (86- 90)

कारण बनी द्रोपदी खुद
कौरव विनाश की मूल पात्र ।
तुम बनी मेरे लिए प्रिय ।
खुद उदधोषिका, प्रेम मिलन का ।

एक हीं फूल तोड़ने से
सूना सूना सा लगा सब वाटिका ।
मेहेक वाटिका में अब कुछ नहीं रहा ।
भवंरा सब उड कर, दुसरी जगह चला ।

जब फूल समझकर तुझे तोड़ा
हरा वृक्ष और पर्वत रोने लगा ।
आंसूवों का धार नदि में मिला
तुझे पीछा करते इंद्रेणी पहुचा ।

तेरी आगमन का संदेश पवन ने लाया
खुशबू मेहेका मेरे आगन में ।
वृक्षलता और प्रकृति सब में
सुलगा यौवन, तेरी मादकता से ।

वृक्षलता के सब रंगिन पुष्प
प्रतिफल बना हम्हारा प्रेम का ।
इद्र धनुष बना स्वयंवर माला
ये कैसा अदभूत संयोग ।

रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Friday, November 20, 2020
Topic(s) of this poem: beauty,flower,love,wind
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