पुष्प बरसा उपर गगन से
उपवन बना प्रणय मंण्डप ।
लतावृक्ष और हिमचुली सब को
हम्हारा स्वयंवर का निमन्त्रण मिला ।
साथ दिया माग की सिंदूर को
माथे की लाल बिंदिया ने ।
और जुल्फों में सजा लाल गुलाफ ने
साथ दिया तेरी चेहरा की लालिमा को ।
फूल गुलाफ का शैया बना
चाँद बादल बीच छीपा ।
दौ जिस्म एक हुआ
मिलन में ही रात बिता ।
तुम्हारी धना जुल्फों के अंडर
हम्हारा चुम्बन बहुत देर तक चला ।
असह्य होकर मेघ गरजा ।
सहमकर तू मुझमें समाया ।
तू जमि मैं आसमा
तू डिम्ब मैं रज।
तू फूल मैं भंवरा
संगम हम्हारा सृष्टि का तोहफा ।
रचनाकार: - तुल्सी श्रेष्ठ
Composed by Tulsi Shrestha
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