सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (91- 95) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (91- 95)

पुष्प बरसा उपर गगन से
उपवन बना प्रणय मंण्डप ।
लतावृक्ष और हिमचुली सब को
हम्हारा स्वयंवर का निमन्त्रण मिला ।

साथ दिया माग की सिंदूर को
माथे की लाल बिंदिया ने ।
और जुल्फों में सजा लाल गुलाफ ने
साथ दिया तेरी चेहरा की लालिमा को ।

फूल गुलाफ का शैया बना
चाँद बादल बीच छीपा ।
दौ जिस्म एक हुआ
मिलन में ही रात बिता ।

तुम्हारी धना जुल्फों के अंडर
हम्हारा चुम्बन बहुत देर तक चला ।
असह्य होकर मेघ गरजा ।
सहमकर तू मुझमें समाया ।

तू जमि मैं आसमा
तू डिम्ब मैं रज।
तू फूल मैं भंवरा
संगम हम्हारा सृष्टि का तोहफा ।

रचनाकार: - तुल्सी श्रेष्ठ
Composed by Tulsi Shrestha
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Friday, November 20, 2020
Topic(s) of this poem: beauty,dream,love,lust,rose,tulsi
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