कभी जीत कभी हार Poem by Amanpreet Mehra

कभी जीत कभी हार

कभी कभी जीतकर हारना अच्छा लगता है,
कभी कभी दूसरे के साथ दुख बांटना भी अच्छा लगता है।
अगर कोई बुरा कहे हमे तो ‌‌उसे हंसकर टाल देना भी अच्छा होता है,
हमें खुशियां तलाशनी है हम रो बहुत लिए है,
के हमें खुशियां तलाशनी है हम रो बहुत लिए है।
दुनिया हमे कमज़ोर बनाती रही,
हमपर इल्ज़ाम लगती रही,
बेवजह हमे सताती गई।
क्या हम मिट्टी से सोना बन पाएंगे?
क्या हम भी सोने सा निखर पाएंगे?
अगर हम काबिल हुऐ,
तो क्या लोग हमें पहचान पाएंगे।
हमारी ज़िन्दगी की कठिनाइयों को जान पाएंगे।
मेरी शायरी को समझ पायेंगे।

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
🙏😊Please like 👉 share 👉 and subscribe 🙏 ya meri khud ki likhi poetry hai
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success