वो जब मुस्कुराती है. Poem by Anand Prabhat Mishra

वो जब मुस्कुराती है.

वो जब मुस्कुराती है, तब आँखें बंद कर लेती है, ,
अपनी इसी अदा से, मुझे अपना कर लेती है
कभी कभी सुन नहीं पाता उसे, पर देखता हूं
वो मुस्कुरा कर कुछ बोल रही होती है किसी से
मैं न जाने कितने ख़्वाब उस मुस्कान से बुन लेता हूं
ओढ़ कर चादर उसकी मुस्कुराहट की
मखमली उसके सपने लिए सो लेता हूं
वो कहती है मेरी मुस्कान बहुत अच्छी है
वो नादान है उसे कैसे कहूं,
तुम्हारी ही छवि चेहरे पर सजा लेता हूं
तेरी ही मुस्कान को अपनी हंसी बना लेता हूं
वो जब गुनगुनाती है हर स्वर में प्रेम भर देती है
वो जब मुस्कुराती है, तब आँखें बंद कर लेती है, ,

थोड़ी अजनबी भी है, पर कुछ जान पहचान है उससे
न जाने क्यों जब मिलती है अपनी सी लगती है
उससे मिलना महज कुछ पल का होता है
पर मेरे दिन भर की संगीत बन होठों से संवरती है
वो लड़की बहुत अच्छी है, उसमें जीवन की पूर्णता देखता हूं
वो है हृदय की ध्वनि, वो सांसों की नरम आहट है
वो लड़की मेरी पहली चाहत है
उसका आगमन जीवन में जीवंतता रस भर देती है
वो जब मुस्कुराती है, तब आँखें बंद कर लेती है, ,

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