*बचपन का पल* Poem by Ashutosh Tiwari

*बचपन का पल*

बचपन एक पल जब मासूम था सब।
तब खेल कूद से ही खुश होते सब।।
तू - तू मैं-मैं में न होती थी तब बुराई।
होती जब भी लड़ाई, पल भर में हो जाती थी मन मनाई।।

न पैसा का झोल था न, होता तब।
न होता धोका नफरत का मोल कोई तब ।।

मां की ममता, बाप का दुलार था सब।
दोस्ती भी थी सबसे प्यारी थी।।

क्या वक्त का मोल क्या माया का झोल।
सब का प्यार था समान, था वो पल अनमोल।।

क्या तेरा-मेरा क्या उसका-इसका हो।
क्या अच्छा क्या बुरा हो का डर आना।।

मेरा पल वो ही था सबसे अनमोल।
पर जाने क्यों अब समझ आने लगा इसका मोल।।

```आशुतोष तिवारी```

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