बचपन कविता Author राहुल कुमार Poem by Author Rahul kumar

बचपन कविता Author राहुल कुमार

वो बचपन कितना अच्छा था,
अपने ही धुन में रहता था।

दोस्तों के साथ मस्ती थी,
हमेशा हॅसते रहता था।

मम्मी कि मार थी,
पापा का फटकार था।

पापा के कंधो का सहारा था,
मम्मी के आँचल मे छुपा प्यार था।

नग्गे पाँव दौड़ता था,
पतंग ना पाने का पछतावा था।

झूटी आंसू रोता था,
अपनी बात मनवाता था।

घर मे सबसे लाडला था,
मम्मी पापा का दुलारा था।

तितली के पीछे भागता था,
मिट्टी का ताजमहल बनाता था।

पापा के पर्स से पैसे चुराता था,
चाँद सितारे खाता था।

कंधो पर कोई जिम्मेदारी ना थी,
ना ही कोई पछतावा था।

सब सुपर हीरो के पीछे भागते थे,
मैं शाहरूख का दिवाना था।

दिन भर खेलते रहता था,
रात को थक कर घर आता था।

दूध-रोटी खाता था,
डोरेमॉन और शिनचेन देखता था।

नये कपड़े पहनता था,
गली-मुहल्ले घुमना था।

बड़े भाई का नाम लेता था,
सभी दोस्तो से लड़ता था।

वो बचपन कितना अच्छा था,
अपने धुन में रहता था।

दोस्तों के साथ मस्ती थी,
हमेशा हॅसते रहता था।
- राहुल कुमार

बचपन कविता Author राहुल कुमार
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