Ishq Poem Rahul Kumar Poem by Author Rahul kumar

Ishq Poem Rahul Kumar

कभी तो अपना इश्क़ ब्यान कर,
थोड़ा ही सही अपना वक़्त मेरे नाम कर

कई साल बीते हैं तेरी हाँ के इंतज़ार में,
ना कह कर ही सही. मुझपे एक दफा एहसान कर

ज़माना हसता है अक्सर मेरी नादानी पर,
मेरे आँखों के सामने तू किसी और से बात ना कर

कई दफा मर चूका हूँ मैं जुनून-ए-इंतज़ार में,
तूं किसी इक जनम में तो पूरा मेरा अरमान कर

लैला-मजनू की जैसे मोहब्बत हैं मशहूर इस ज़माने,
छोटा -मोटा ही सही मगर अपना इश्क़ तो मेरे नाम कर..!
- राहुल कुमार

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