Kitabon Ke Panne Poem by mayank rakesh

Kitabon Ke Panne

किताबों के पन्ने पलट कर
मुझे भी दो शब्द लिखने दो||

अपने हाथो की लकीरो पर
मुझे अपनी किस्मत भी लिखने दो ||

चला जाऊंगा इस दुनिया से एक रीत शुरू कर के
थोड़ा सब्र तुम कर लो,
थोड़ा उनको भी करने दो ||

Sunday, August 12, 2018
Topic(s) of this poem: change,positiveness
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success