Manav Shastra (Hindi) Poem by Malay Roychoudhury

Manav Shastra (Hindi)

मानव-शास्त्र
मैं लुटने को तैयार हूँ, आओ, ओ घातक चमगादड़!
फ़ाड़ दो मेरे कपड़े, उड़ा दो मेरे घर की दीवारें
बन्दूक चलाओ मेरी कनपटी पर और मुझे कारा में पीटो.
फ़ेंक दो मुझे चलती ट्रेन से: बंधक रखो और नज़र रखो मुझपे;
मैं एक भू-गर्भीय यंत्र हूँ, परमाणु युद्ध की झलक देखने को जीवित
एक अधर्मी खच्चरी का नीले-लिंगी अश्व द्वारा गर्भाधान..

Friday, January 31, 2020
Topic(s) of this poem: hindi
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