Kaifi Azmi

(19 January 1919 - 10 May 2002 / Azamgarh / British India)

मेरे दिल में तू ही तू है - Poem by Kaifi Azmi

मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ

ख़ुद को खोकर तुझको पा कर क्या क्या मिला क्या कहूँ
तेरा होके जीने में क्या क्या आया मज़ा क्या कहूँ
कैसे दिन हैं कैसी रातें कैसी फ़िज़ा क्या कहूँ
मेरी होके तूने मुझको क्या क्या दिया क्या कहूँ
मेरी पहलू में जब तू है फिर मैं दुआ क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ

है ये दुनिया दिल की दुनिया, मिलके रहेंगे यहाँ
लूटेंगे हम ख़ुशियाँ हर पल, दुख न सहेंगे यहाँ
अरमानों के चंचल धारे ऐसे बहेंगे यहाँ
ये तो सपनों की जन्नत है सब ही कहेंगे यहाँ
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है दिल से जुदा क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ


Comments about मेरे दिल में तू ही तू है by Kaifi Azmi

  • Abduhoo Salamath (8/25/2016 3:08:00 PM)


    ے یہ دنیا دل کی دنیا، ملکے رہیں گے یہاں
    لوٹیں گے ہم خوشیاں ہر لمحے، دکھ نہ سهےگے یہاں

    bahuth khoob kia kahney hain..
    (Report) Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Friday, April 13, 2012

Poem Edited: Friday, April 13, 2012


[Report Error]