Yaas Yagana Changezi

(1883 /1884 - 02 February 1956 / Azeemabad, Patna / British India)

शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का - Poem by Yaas Yagana Changezi

सिलसिला छिड़ गया जब यास के फ़साने का
शमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने का

वाए हसरत कि ताल्लुक़ न हुआ दिल को कहीं
न तो काबे का हुआ मैं न तो सनम-खाने का

खिल्वत-ए-नाज़ कुजा और कुजा अहल-ए-हवस
ज़ोर क्या चल सके फ़ानूस से परवाने का

वाह किस नाज़ से आता है तेरा दौर-ए-शबाब
जिस तरह दौर चले बज़्म में परवाने का

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Poem Submitted: Tuesday, April 17, 2012

Poem Edited: Tuesday, April 17, 2012


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