राधे कृष्ण Poem by Yashika Agrawal

राधे कृष्ण

कान्हा इतनी सी अरज सुन लो ना,
अबकी बार वृंदावन बुला लो ना, ,
तरस गई है आंखे तुम्हारे दीदार को,
इन आंखो को तुम्हारा दीदार करा दो ना, ,
मैंने सुना है तुम्हारी चोखत से कोई खाली हाथ न जाता है,
जो लगाये 7 कोस की परिक्रमा उसका उद्धार हो जाता है, ,
तो कान्हा मेरे भी पाउ ब्रज की रज में ठंडे कर दोना,
उस निधि वन में मुझे भी रास दिखा दो ना, ,
इतना तो भाग्य मेरा भी लिखा होगा सौभाग्य मेरा तुम्हारा दीदार हो,
मैने सुना है कान्हा तुम मनमोहक हो,
श्रृंगार भी मानो बहुत रोचक हो, ,
पाउ में पायल और पोशाख पीतांबर हो,
कान में कुंडल और हाथ में बासूरी हो, ,
तभी तो राधा रानी के तुम कान्हा हो,
और 16108 रानियों के तुम बिहारी हो, ,
तो इस और एक की अरज स्विकारो ना।
मथुरा वृंदावन बुलालो ना बुलालो ना।।
                          राधे राधे।।
Yashi❤

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