Ratnesh Gandhi

Ratnesh Gandhi Poems

उठ जा ए मुसाफिर, पथ पर चल,
ये काले बादल छँट जाएँगे।
क्या हुआ अगर ये बरस गएँ!
अमृत ही तो बरसाएँगे।
...

चुन लक्ष्य अपना, ऐ मानव,
मंज़िल को तुम कूच करो।
ना मिले यदि तुम्हें पथ कोई,
तो खुद पथ का निर्माण करो।
...

अगर माँ नहीं होती,
तो ये संसार नहीं होता,
ये देश नहीं होता,
ये ब्रम्हाण्ड नहीं होता।
...

देख फूल तू खुश् ना होगा
माली का दिल तोड़ के
अपने स्वार्थ के खातिर
चाहे जिससे रिश्ता जोड़ के
...

हर साल शीत के बाद
मौसम का नया आगाज़ होता है
फूल खिलते है
बाग़ महक उठते हैं
...

•• मेरी माँ ••

उससे ही शुरू और उसी पे ख़त्म ये जिंदगी है मेरी
वो कोई और नहीं सिर्फ माँ है मेरी
...

••बचपन••
काश लौट आतें वो प्यारे
बचपन के दिन मधुर हमारें
पेड़ो पर तो चढ़ना होता
...

••सीख पतंग से••
आसमाँ में उड़ते पतंगों से सीखो,
अपनी जिंदगी की डोर
किसी और के हाथों में होते हुए भी,
...

The Best Poem Of Ratnesh Gandhi

उठ जा ए मुसाफिर

उठ जा ए मुसाफिर, पथ पर चल,
ये काले बादल छँट जाएँगे।
क्या हुआ अगर ये बरस गएँ!
अमृत ही तो बरसाएँगे।

ये आना - जाना बादल का,
ये उठना - गिरना लहरों का,
पूनम और अमावस का,
आना - जाना तो लगा ही रहता है।

चींटी का दीवारों पे,
चढ़ना - गिरना तो लगा ही रहता है।
ऊँची आँधियों में,
ऊँची, आँधियों में,
नीड़ का बिखरना, और, फिर बनना,
लगा ही रहता है।
बस जीव को अपने अंदर,
थोडा सा, धैर्य रखना होता है।

कोयले से हीरा बनना,
आसान नहीं होता।
पर ये भी तो सच है कि,
ये ना कह देने वाला, कोई काम नहीं होता।

ताप सहन करने की बस सामर्थ्य चाहिए,
बादलों से न डरने वाला, बस एक निडर इंसान चाहिए।

जिसने सहा ताप, वो हीरा बनकर आया है,
'रत्न', अब तू भी सह ताप,
तू रत्न बनकर आएगा।
ना घबरा इन बादलों से,
झेल ले इन्हें,
देखना, तू भी अमृत ही पायेगा।

उठ जा ए मुसाफिर, पथ पर चल,
ये काले बादल छँट जाएँगे।
क्या हुआ अगर ये बरस गएँ!
अमृत ही तो बरसाएँगे।

-रत्नेश गाँधी

Ratnesh Gandhi Comments

Ayush Kumar SinghSPIC 31 March 2019

Nice bro

1 0 Reply
Prashant tiwari 10 July 2018

Mast hai sir 👍☺️

2 0 Reply
Close
Error Success