Ratnesh Gandhi Poems

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1.
उठ जा ए मुसाफिर

उठ जा ए मुसाफिर, पथ पर चल,
ये काले बादल छँट जाएँगे।
क्या हुआ अगर ये बरस गएँ!
अमृत ही तो बरसाएँगे।
...

2.
लक्ष्य

चुन लक्ष्य अपना, ऐ मानव,
मंज़िल को तुम कूच करो।
ना मिले यदि तुम्हें पथ कोई,
तो खुद पथ का निर्माण करो।
...

3.
अगर माँ नहीं होती

अगर माँ नहीं होती,
तो ये संसार नहीं होता,
ये देश नहीं होता,
ये ब्रम्हाण्ड नहीं होता।
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4.
फूल तू सम्भल जा

देख फूल तू खुश् ना होगा
माली का दिल तोड़ के
अपने स्वार्थ के खातिर
चाहे जिससे रिश्ता जोड़ के
...

5.
मुर्झाये बसंत

हर साल शीत के बाद
मौसम का नया आगाज़ होता है
फूल खिलते है
बाग़ महक उठते हैं
...

6.
मेरी माँ

•• मेरी माँ ••

उससे ही शुरू और उसी पे ख़त्म ये जिंदगी है मेरी
वो कोई और नहीं सिर्फ माँ है मेरी
...

7.
बचपन

••बचपन••
काश लौट आतें वो प्यारे
बचपन के दिन मधुर हमारें
पेड़ो पर तो चढ़ना होता
...

8.
सीख पतंग से

••सीख पतंग से••
आसमाँ में उड़ते पतंगों से सीखो,
अपनी जिंदगी की डोर
किसी और के हाथों में होते हुए भी,
...

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