Sachin Tiwari Poems

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1.
उम्मीद

दिल में है जिंदा, उम्मीद की कहानी अभी।
थक गया हूं बेशक, पर हार न मानी अभी।।

काटों भरी राह में, ज़ख्म मिल चुके हैं कई।
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2.
रोटी

मसला तो बस रोटी का है, साहेब
वरना वो कहां इतना मजबूर होता
उसके भी दिल में कुछ सपने पलते
आँखों में जिन्हें पाने का नूर होता
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3.
इश्क की राह

एक घने कोहरे से, गुजर रहे है हम इन दिनों l
नजरों के सामने होकर भी, नजर वो आते नहीं ll

दो कदम बढ़ाकर रुक गए वो, और हम चलते रहे l
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4.
सफर

क्यों हुआ निराश तू, सफर से ओ मुसाफिर l
ये तो वो लम्हा है, जो यूं ही गुजर जायगा ll

मंज़िल जब होगी हांसिल, यकीनन l
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5.
वृक्षारोपण

उसकी ही छांव तले आराम करने लगे
जिसे काटते- काटते थक गए थे, बेपीर
बेशर्मी की इन्तेहाँ से, वाकिफ जो न थे
न कुल्हाड़ी रूकी, न ही फलों का गिरना
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