Ankit Kumar Srivastava


Best Poem of Ankit Kumar Srivastava

पैकेज की फेर में फंसा दीपक...........

मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता है,
दीपक।
परसों मुझसे मिला तो
बड़े शिकायती लहजें में कहने लगा।
आजकल खिड़की से झांकने से भी डर लगता है।
हर निगाह तरेरती है,
घूरती है मुझे,
अनजान निगाहें भी
पूछती है मुझसे,
पढ़ा-लिखा तो बहुत
अब क्या कर रहे हो?
"घर पर बैठा हूं"
यह जवाब सुनते ही
भावुक हो जाते है
फिर बेपरवाही की हद से देखते है।
इग्नोर मारते है,
हें चले आते है कहां-कहां से
येवों ही।
ट्रिंग-ट्रिंग बजते ही
मैं सिहर उठता हूं।
अब कौन-सा दोस्त
या रिश्तेदार है उधर,
जो ये पूछ बैठेगा
तब क्या चल रहा है आजकल,
‘कुछ ...

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