|| श्री महाकाल तांडव स्तुति ✍️ ||
|| संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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सदाशिव शंकर महेश्वर महेश,
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|| मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ✍️ ||
|| हिंदी काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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विराजमान भाल चंद्र, गंग धार मस्तकम्,
प्रिये सुअंग गौरि वाम, शोभते सुहस्तकम्।
सुगंध पुष्प माल कण्ठ, मुण्ड माल राजते,
अनंत प्रेम रूप देखि, कामदेव लाजिते ॥१॥
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🥀 || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
🥀 || 💔 दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए 💔 ||
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कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१||
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Hindi poet and educator. D.O.B: 22-01-1981 Birthplace: Darbhanga, Bihar Education: B. Sc., M.Sc., M.B.A Place of work: Delhi.)
हां तुम!
हां तुम!
मैंने चाहा है तुमको
मेरी चाहतों में तुम I
गुजरे कल में तुम
उगते सूरज में तुम I
बहती हवाओं में तुम
बरसते बादलों में तुम I
खिलते फूलों में तुम
ढलती शामों में तुम I
हां तुम!
मन की सुंदरता
तन का सुंदर रूप I
लब तेरे मधुशाला
हर अंग पुष्प की माला I
स्वप्न की परी तुम
हो यौवन रस का अमृत प्याला I
हां तुम!
तुम जीवन ज्योति
तुम करुणा तुम भक्ति
तुम ही मेरा बंधन I
मेरा इश्क तुम
मेरी जान तुम
मेरा हर लम्हा तुमसे
तुम ही मेरा दर्पण I
हां तुम!
बेचैन दिल तन्हा मन
तस्वीर तेरी चूमते नयन I
मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे
जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I
मेरा ख्वाब मेरी हकीकत
मेरी चाहत मेरा जूनू
हां तुम!
-बाल कृष्ण मिश्रा
मोबाइल: 8700462852
E-mail: [email protected]