Bal Krishna Mishra

Bal Krishna Mishra Poems

कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१||
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विराजमान भाल चंद्र, गंग धार मस्तकम्,
प्रिये सुअंग गौरि वाम, शोभते सुहस्तकम्।
सुगंध पुष्प माल कण्ठ, मुण्ड माल राजते,
अनंत प्रेम रूप देखि, कामदेव लाजिते ॥१॥
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🥀 || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
🥀 ||  💔 दंश ले जो तू मुझे, तो नींद आ जाए 💔 ||
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हां तुम!

  मैंने चाहा है तुमको
 मेरी चाहतों में तुम I
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|| श्री महाकाल तांडव स्तुति ✍️ ||
|| संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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सदाशिव शंकर महेश्वर महेश,
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|| मातृभूमि (माँ) तुझे प्रणाम ✍️ ||
|| हिंदी काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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।। माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ ||

|| संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ ||
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शिवालयों से शंखनाद हुआ,
गूंजा यह संदेश,
हर नारी में दुर्गा जागे,
हर पुरुष शिव रूप बन जाए।
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सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं,
कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः।
नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी,
शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥
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मैं बेचारा तन्हा अकेला
भीगी राहों पर
ढूँढ रहा, खुद को, कहीं |
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माँ
जिसके रक्त से जीवन का सृजन है
जिनके श्रम से मिला जीवन को दर्शन ||
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मन की वीणा मौन खड़ी थी,
भावों की कली अनखिली थी।
तुमने छूकर तार जगाए,
शब्दों के सुंदर सुर गाए।
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वो तप है, धर्म है, विवेक है, कर्म है
वो विद्या है, बुद्धि है, बल है, श्रम है ||

वो श्री है, शक्ति है, श्रेष्ठ है, संबल है,
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जयति जयति जगदम्ब भवानी,
आदि शक्ति परमेश्वरी कल्याणी।
दनुजदलन-दुष्टदमन-कारिणि,
जय जय जननि जगत्तारिणि॥
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Bal Krishna Mishra Biography

Hindi poet and educator. D.O.B: 22-01-1981 Birthplace: Darbhanga, Bihar Education: B. Sc., M.Sc., M.B.A Place of work: Delhi.)

The Best Poem Of Bal Krishna Mishra

|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || __________________________________

कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१||

ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका,
धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी।
कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी,
नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२||

रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता,
चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी।
अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी,
प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३||

जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी,
सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी।
प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी,
जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४||

जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी,
विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी।
धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके,
किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ||५||

महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब-डम्बिका,
प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ||६||

नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त-मेखला-सु-शोभिनी,
कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ||७||

नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी,
कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी।
समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी,
भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ||८||

प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-
वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ||९||

क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी,
क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी।
क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी,
नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ||१०||

रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता,
चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता।
धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी,
प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ||११||

नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका,
कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी।
महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी,
जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ||१२||

समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी,
षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी।
महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी,
मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ||१३||

अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी,
विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा।
इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं,
पठन्न् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ||१४||

नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे,
नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे।
नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ||१५||

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✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा
🏠 स्थान -- नई दिल्ली
📲: 8700462852
📧 ई-मेल -- [email protected]

Bal Krishna Mishra 🙏
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