kumar Malay Singh

kumar Malay Singh Poems

धुप छुप सी गई है कही
बदली जो नींद से जगी है
बुँदे चूम रही है धरती को
रही है मेरे मन को
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The Best Poem Of kumar Malay Singh

धुप छुप सी गई है कही

धुप छुप सी गई है कही
बदली जो नींद से जगी है
बुँदे चूम रही है धरती को
रही है मेरे मन को

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