Kumar Sachin Poems

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सोचा कि थोड़ा ज़हर चुरा लू,
तू नहीं तेरी यादों को ख़िला दूँ |
मरके भी जीने ना देंगी मुझे,
सोचा इन्हे सबसे पहले मिटा दूँ ||
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