Monday, September 7, 2015

चाँदिनी में फिर भीगी हुई है रात। Comments

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चाँदिनी में फिर भीगी हुई है रात,
उन्मुक्त गगन में ज्यादा निखरी हुई है रात,
ख़ुशी में झूम रहे है इसके सरे चाहने वाले..
पेड़, पहाड़ नदियाँ और तालाब।
...
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Shubham Praveen
COMMENTS
Rajnish Manga 07 September 2015

मोती जैसे शब्दों द्वारा चाँदनी रात का आपने जो चित्र खींचा है, वह मनोहर ही नहीं बल्कि अलौकिक है. धन्यवाद. एक छोटा सा उद्धरण: चाँदिनी में आज फिर भीगी हुई है रात /.....पेड़, पहाड़ नदियाँ और तालाब / यह अपनी खुशियाँ सबसे बाँटती है / ले आओ अपनी खली गगरियाँ सामने,

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