Lalit Kaira

Freshman - 593 Points (13/04/1985 / Binta, India)

दर्द से ही मुक्कमल मेरा शेर होगा - Poem by Lalit Kaira

मेरी कविता मेरी ग़जल से निकल के
आगोश में आजा हवा सी मचल के

जो गुजरा है तेरी बांहों में एक पल
वो इक पल साथ देगा दिन अजल के

दर्द से ही मुक्कमल मेरा शेर होगा
अरमान आखों से निकालेंगे पिघल के

मैं तन्हा उदास रुसवा हूँ तू आजा
मेरी कविता मेरी गज़ल से निकल के

Topic(s) of this poem: love and life


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Poem Submitted: Monday, November 2, 2015



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