Friday, November 20, 2015

दिल दुखाया न करो Comments

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तन्हाइयों में मेरी तुम आया न करो.
अर्ज तुमसे है दिल ये दुखाया न करो.

खंजरे अक्स तेरा सीने में उतर जाता है.
...
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Upenddra Singgh
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Rajnish Manga 20 November 2015

बहुत सुंदर, वाह... वाह! कविता में अभिव्यक्ति का यह अंदाज़ बहुत भाया. धन्यवाद, उपेन्द्र जी. एक सुझाव: निम्न पंक्तियों में मदिरा-ए-हुस्न के स्थान पर शराब-ए-हुस्न लिखना ज्यादा उचित होगा (मदिरा हिंदी का शब्द है) . ये रूप ये यौवन ये गेसुओं कि घटायें. मदिराये-हुस्न मुझको पिलाया न करो.

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Upendra Singh Suman 03 December 2015

शुक्रिया

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Upenddra Singgh

Upenddra Singgh

Azamgarh
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