Ajay Srivastava

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सब का कर्तव्य - Poem by Ajay Srivastava

प्रेम को आप बाटो|
नफरत को हम हटाऐगे|

दोस्ती को तुम निभाऔ|
दुशमनी को हम जाने को कहेगे|

शांति के प्रयास आप करो|
युद्ध को हम बंद करवाऐगे|

प्रगति की और कदम आप बढाऔ|
प्रगति की राह सरल हम कर देंगे|

विशवास को आप कायम करो|
अविशवास को हम पानी मे बहा देंगे|

यही सोच हम सबकी है|
सोच को कर्म मे बदलना भी हम सब का कर्तव्य है|

Topic(s) of this poem: inspirational


Comments about सब का कर्तव्य by Ajay Srivastava

  • Rajnish Manga (1/12/2016 4:44:00 AM)


    ज़िन्दगी को उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए हा किसी का सहयोग वांछित है. बहुत सुंदर. धन्यवाद, मित्र. (Report) Reply

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Poem Submitted: Tuesday, January 12, 2016



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