Ajay Srivastava

Gold Star - 11,191 Points (28/08/1964 / new delhi)

फूल - सुन्दर रूप - Poem by Ajay Srivastava

काटो के साथ रहते हो
फिर भी सब को अपनी और आकर्षित कर लेेते हो|

अकेले रहते हो
प्रेम रंग मे रंग जाते हो|

एकञित हो जाते हो
स्वागत करने को आतूर हो जाते हो|

बिखर जाते हो
क्ष्रद्धा सुमन बन जाते हो|

दर्द झेलते हो
सब को सम्मन्ति कर देते हो|

मसल दिए जाते हो
विश्व का सबसे सुन्दर रूप आ जाते हो|

फूल मसले जाने पर भी
ईञ बन समस्त वातावरण को सुगन्धित कर देते है|

Topic(s) of this poem: flowers


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Poem Submitted: Monday, January 25, 2016



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