😊बेशर्😊
क्या -क्या है गुल खिलाता बेशर्म मीडिया।
दूध सपोलों को है पिलाता बेशर्म मीडिया।
टीआरपी का भूखा हैवान बन गया ये।
आग घर में है लगाता बेशर्म मीडिया।
वो 'आज तक' 'आज तक' ना रहा।
है गद्दारों के गीत गाता बेशर्म मीडिया।
एनडी व एबीबी की देखी है बेहयाई।
है गद्दारों को सिर चढ़ाता बेशर्म मीडिया।
ख़बरों की हवस में ये पागल सा हो गया है।
जयचंदों से दिल लगाता बेशर्म मीडिया।
सच का गला दबा ये करता गलतबयानी।
आइना औरों को दिखाता बेशर्म मीडिया।
हमने है 'सुमन' देखी इसकी वो आसनाई।
वेश्याओं सा है बिक जाता बेशर्म मीडिया।
उपेन्द्र सिंह 'सुमन'
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