Upendra Singh 'suman'

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करवा दा हो सेलरिया (भोजपुरी रचना) - Poem by Upendra Singh 'suman'

प्रभु जी करवा दा हो सेलरिया,
बनिया टोकय बीच बजरिया.

जेब ह खाली हाथ ह खाली.
कइसे चुप बइठी घर वाली.
मोहें ताना मारे गुजरिया.

बात-बात में बात बढ़ावे.
गुस्सा हो उपर चढ़ी धावे.
उ त फेंकि देति बा थरिया.

राह चलत अब होय तगादा.
लाज से गड़ी जालंय मोरे दादा.
अब कईसे चलीं डगरिया.

कईसे केकरा के समझाइं.
कईसे आपन बिपति बताइं.
लोगवा माँगय मोंसें उधरिया.

रात-रात भर नींद न आवे.
बचवन कय पीड़ा तड़पावे.
दुखी देखि ना जाले मेहरिया.

मन समझावे छोडि दा दिल्ली.
बाँझ उड़ाति बा ई खिल्ली.
अरे, चलि जा ‘सुमन’ तूं झरिया.

Topic(s) of this poem: country, life

Form: ABC


Comments about करवा दा हो सेलरिया (भोजपुरी रचना) by Upendra Singh 'suman'

  • (12/7/2015 2:07:00 AM)


    Kya Khoob Likhte hain! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! (Report) Reply

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    0 person did not like.
  • Akhtar Jawad (12/2/2015 9:26:00 PM)


    Liked this Bhojpuri poem.......................... (Report) Reply

  • Rajnish Manga (12/2/2015 8:25:00 AM)


    परदेस गए प्रीतम का इंतज़ार करती सजनी की मनोदशा का सुंदर चित्रण. धन्यवाद. (Report) Reply

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Poem Submitted: Wednesday, December 2, 2015



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