पूर्वजन्म की पत्नी
बनारस का अस्सी घाट.शाम को गंगा जी की आरती हो रही थी.मैं आकर चुपचाप घाट की सीङी पर बैठकर आरती देखने लगा.मेरे बगल में एक नवविवाहित स्त्री अपने गोद में दो महिने के बच्चे को लेकर बैठी थी.
मैं आरती देख रहा था कि वह स्त्री बिना कुछ कहे अपने बेटे को मेरी गोद में रख दी.मैं बच्चे को हाथ में लेकर खेलाने लगा.मैं कभी बच्चे को देखता तो कभी उस सुन्दर स्त्री को.एक पल के लिए मुझे लगा जैसे वह स्त्री पूर्वजन्म की मेरी पत्नी रही हो और वह बच्चा मेरा बेटा.
...
Read full text