सत्य Poem by Shabab Anjum

सत्य

कहते हैं वो कुछ नहीं है ऐेेसा,
सत्य है पर ये जीवन मरन के जैसा;
ऐसा कि अंधा भी देखे,
देख के उसको हैवान भी कांपे।
धन के पीछे पागल हैं वो,
लज्जत के बस कायल हैं वो;
कर जाते हैं ऐसे काम घिनौने,
नही आगे कुछ उनके हवस के जैसे।
हो गई अब ये बात पुरानी,
डराती थी जब राक्छसौं की कहानी;
कांप जाता है अब तो अंग अंग,
देखे कर ये रूप इंसानी।
लोग दोहरा रूप बनाते हैं,
कुछ बेबाकी का ढोंग रचाते हैं;
छुपते हैं शब्दौं के जाल के पीछे,
झुठला देंगे सच्चाई को जैसे!
दिल कुढता है कि इंसानी हूं मैं,
शर्म के मारे पानी हूं मैं।

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