वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं
वो जब मेरे क़रीब था
ये मेरा नसीब था
अब वो मुझसे दूर हैं
तो अब वो बहूत गरीब हैं
वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी इसमें समाई हैं
और वक़्त अपने साथ - साथ जीवन के हर घडी में हैं
कोई फायदा हैं, तो हमारा हैं
कोई नुक्सान हैं, तो तुम्हारा हैं
मगर सच तो ये हैं के
ज़िन्दगी के हर लम्हे का एक सहारा हैं
ये हमारा हैं और वो तुम्हारा हैं
जो न समझा, वो बड़ा बदनसीब हैं
वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं
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न्दगी के हर लम्हे का एक सहारा हैं ये हमारा हैं और वो तुम्हारा हैं जो न समझा, वो बड़ा बदनसीब हैं वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं.... nice presentation.Beautiful poem. Thanks for sharing.