वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं Poem by ainan ahmad

वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं

वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं
वो जब मेरे क़रीब था
ये मेरा नसीब था
अब वो मुझसे दूर हैं
तो अब वो बहूत गरीब हैं
वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी इसमें समाई हैं
और वक़्त अपने साथ - साथ जीवन के हर घडी में हैं
कोई फायदा हैं, तो हमारा हैं
कोई नुक्सान हैं, तो तुम्हारा हैं
मगर सच तो ये हैं के
ज़िन्दगी के हर लम्हे का एक सहारा हैं
ये हमारा हैं और वो तुम्हारा हैं
जो न समझा, वो बड़ा बदनसीब हैं
वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं

Wednesday, March 15, 2017
Topic(s) of this poem: life
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 15 March 2017

न्दगी के हर लम्हे का एक सहारा हैं ये हमारा हैं और वो तुम्हारा हैं जो न समझा, वो बड़ा बदनसीब हैं वक़्त भी चीज बड़ी अजीब हैं.... nice presentation.Beautiful poem. Thanks for sharing.

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