गूंज उठा पहाड़ तेरी प्यार में
गूंज उठा हरा-भरा पहाड़ो का चोटियां ।
तेरी होठो से निकली प्रेम गीत के संग
बहकने लगी नदियाँ तेरी नृत्य के संग
वृक्ष लताएं झुमने लगा तेरी यौवन के संग
मीत लगाई तुम ने चंचल पवन के स्वर संग
तेरी काली घना जुल्फे लहराने लगा उन के संग ।
आँचल तेरी फरफराने लगा य दोनो के संग
फिजाकर पंख मोरनी झुमने लगा तेरी संग ।
देखने लगा मैं दिल थामके, तेरी मस्ती भरी यौवन
दौडी चलीआई तू, लिपट ने पिया के संग ।
तू पिघली मेरा आगोस बर्फ के तरह
मथुर स्वर मे गाने लगा कोेयल प्रेम गीत तुम संग ।
मेहक तेरी बलखाती हुई जिस्म के संग
बहकने लगा मेरा नाजुक दिल की धड़कन ।
परछाई तेरी मुझ मे समा गई, सरमाते सरमाते
लरखराने लगा मैं, तेरी नशीली आँख के जाम से ।
देखकर, बारिश से भीगी हुई तेरी बदन
लजाकर, कलिया छुप गया हरा पतों के संग ।
छेडने पहुचे पवन तेरी नाजुक अंगो के संग
देख, रंग गई क्षितिज, धर्ती के प्यार में ।
तू बनी मेरी मंजिल, ओैर पहचान भी
आओ मिले हम प्राण और वायु की तरह ।
भले मुझे मिले गम, दुनिया भर का
हर जग की खुशियां, तेरी आँचल मे भर दूँ ।
ख्वाबाे का मलिका, मेरी हम सफर तू
मेहबूबा तू, प्रतिफल मेरा पूजा का
तू भावना, मेरा कविता का
बनकर तू आई, संगीत मेरा गीत का ।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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