आज मुल्क का हर शै मुल्क पे निसार है
क्या आज़ादी की फिर एकहुंकार है.
हाँ,
ये रूत वही है, जान लो, सुन लो और पहचान लो
...
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शानदार, अद्भुत, वीर रस भरपूर, यथार्थवादीता की आवाज़, जोशभरपूर! लयबद्धता का उत्कृष्ट नमूना!
Kya bat hai.too good...........