कोरोना क्या कहता हमसे? Poem by Ajay Amitabh Suman

कोरोना क्या कहता हमसे?

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कोरोना  क्या  कहता  हम से,
ना निकलो तुम अपने घर से। 
ना  खुद  पे  कोई शासन था,
ना  मन  पे  कोई  जोर चले।

जंगल  जंगल  कट  जाते हैं,
जाने  कैसी  ये  दौड़  चले।
जब  तुमने  धरती माता के,
आँचल  को  बर्बाद  किया।

तभी  कोरोना  आया  है,
धरती माँ ने ईजाद किया।
देख कोरोना आजादी का,
तुम को  मोल  बताता  है।

गली  गली  हर शहर शहर,
ये  अपना ढ़ोल बजाता है।
जो खुली हवा की साँसे है,
उनकी कीमत पहचान करो।

ये आजादी जो मिली हुई है,
थोड़ा  सा  सम्मान  करो ।
यहो कोरोना कहता हमसे,
बढे चलो पर थोडा थम से ।

अजय अमिताभ सुमन

कोरोना क्या कहता हमसे?
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Ajay Amitabh Suman

Ajay Amitabh Suman

Chapara, Bihar, India
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