हमारे वास्ते Poem by Narender Singh Bansal

हमारे वास्ते

हमको हमारे घर से
निकाला गया है

धड़कने गिरवी है
दिल के वास्ते

हमको हमी से
छुपाया गया है
हमारे वास्ते

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