कहेगा कोई Poem by Narender Singh Bansal

कहेगा कोई

ऐसा कब
कहेगा
कोई

तुम नफ़रतों
की दिवारें
खड़ी कर दो
हम हवा
बन के
घुल मिल जाएँगे

COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success