खबरदार Poem by Upenddra Singgh

खबरदार

खबरदार! ! ! ! ! ! ! ! ! !
अब हमारे हाथों में SC, ST Act की घातक तलवार है
परिणाम जाहिर है -
इधर रार है
तकरार है
और उधर हर मोर्चे पर तुम्हारी हार है।
बोलो! बताओ! चीखो! चिल्लाओ!
गर हिम्मत हो तो आँखें मिलाओ।
मुँह खोलो! होश ठिकाने हो तो बोलो!
अब हमारा क्या बिगाड़ लोगे योग्यता वालों? ? ? ? ?
तुम्हारी योग्यता पर अब बंदिश है
सरकारी ताला है।
और हमारा अंदाज आला है
नायाब है, निराला है।
तुम्हारी आज़ादी पर सख्त पहरा है।
आँख खोलकर देखो संकट कितना गहरा है।
अब चक्रव्यूह चाक-चौबंद है
बाहर निकलने का प्रत्येक द्वार बन्द है।
हमारा तरकश भी जहरीले तीरों से भरा है।
ये सब 'माया' की माया है
चहुंओर काले कानून का घना साया है
वैसे, दिल्ली का दिल भी कमोबेश 'मुलायम' है।
अंधेरा पूरी तरह कायम है।
खैर,
अब बात पते की सुनाता हूँ।
और तुमको तुम्हारी औकात बताता हूँ।
सुनो!
अब, हमारी मुट्ठी में तुम्हारा अधिकार है।
हमारे पास कानून को अन्धा बनाने का अचूक औजार है।
प्रजनन शक्ति अपार है।
दुनियाँ जाये भाड़ में
हम सफल हैं जुगाड़ में।
हमारे साथ संसद है
अधिकार भी बेहद है
तुम्हारी तो हद है।
हमारा कद बहुत बड़ा है।
संविधान हमारे साथ खड़ा है
हमारे पास परजीवी बने रहने का विशेष प्रावधान है
विविध विधान है।
सर्वोच्च न्यायालय हो न हो........
हमारे पास विशेषाधिकार है
हमारे साथ 'हमारी'भारत सरकार है।
खबरदार! ! ! ! ! !
हमारे पास काले कानून का खौफनाक हथियार है।

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Upenddra Singgh

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Azamgarh
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