तुम्हें हिन्द है बुलाता जग जाओ ये जवानों।
बन के सुभाष शेखर फिर आओ ये जवानों।
हनुमान सा वो पौरूष लगता भुला चुके हो।
विस्मृति की नींद तोड़ो फिर धाओ ये जवानों।
तुमको बुला रहा है अहले वतन तुम्हारा।
फिर क्रान्ति की मशाल जलाओ ये जवानों।
है जुस्तजू 'सुमन' की महके चमन हमारा।
फिर वादियों में फूल खिलाओ ये जवानों।
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